हमारे गणतंत्र का यह कैसा 'हत्यारा' मेहमान?

एमेजॉन जंगलों के 'हत्यारे' ब्राज़ील के राष्ट्रपति को भारत की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि बनाया गया है. वे आएंगे और राजकीय सम्मान के साथ भारतीय गणराज्य उनका स्वागत करेगा.

- कबीर संजय

जाएर बोलसोनारो जी का नाम तो आप लोगों ने सुना ही होगा. वही, जिन्होंने एमेजॉन के जंगलों को साफ करने की कसम खा रखी है. जी हां, यही श्रीमान इस बार हमारे यहां गणतंत्र दिवस परेड की सलामी लेने वाले विदेशी मेहमान होंगे. उन्हें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया है.


हमारे वाले स्वनामधन्य हाल ही में ब्राजील गए थे. वहां पर उन्होंने बोलसोनारो को इसके लिए न्यौता दिया. न्यौता उन्होंने स्वीकार भी कर लिया. वे आएंगे और राजकीय सम्मान के साथ भारतीय गणराज्य उनका स्वागत करेगा.


यह उन्हीं की करनी है जिसके चलते इस वर्ष एमेजॉन के जंगलों को सबसे ज्यादा तेज़ी से नष्ट किया गया. यह इस क़दर हुआ कि जंगलों में लगाई गई आग के धुएं से आस-पास के कई शहर ढक गए. हर मिनट यहां पर फुटबाल के एक मैदान के बराबर का जंगल साफ कर दिया गया. न जाने कि कितने पेड़ कोयला बन गए, न जाने कितने जीव-जंतु काल-कवलित हो गए.

एमेजॉन के जंगल पूरी दुनिया के लिए सांस लेते हैं. उनके नहीं होने से न जाने कितने करोड़ लोगों के फेफड़े काले हो जाएंगे. लेकिन, इसकी परवाह किसको है. पर्यावरण के मुद्दों पर मुखर रहने वाले कुछ मुट्ठीभर लोग जाएर बोलसोनारो के भारत आने का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि भारत में प्रकृति की पूजा की जाती है, उसे मां माना जाता है. ऐसे हत्यारे का हमारे यहां कतई स्वागत नहीं किया जा सकता.


लेकिन, इन मुट्ठी भर लोगों की परवाह कौन करता है. हमारे देश की एक सौ तीस करोड़ जनता की इच्छाओं-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व संसद में 543 लोग करते हैं. सिर्फ़ इतने लोगों पर इन करोड़ों लोगों की ज़िम्मेदारी है.


लेकिन, अभी हाल ही में प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान इनमें से ज़्यादातर सांसद चर्चा से अनुपस्थित रहे. उन्हें यह चर्चा महत्वपूर्ण नहीं लगी. क्योंकि, उनके यहां एयर प्यूरीफ़ायर की संख्या बढ़ती जा रही है. एक दिल्लीवाले तुनकमिजाज़ सांसद हैं जिन्हें प्रदूषण पर चर्चा से ज़्यादा पोहे-जलेबी पसंद है.


ऐसे देश में गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य अतिथि जाएर बोलसोनारो से ज्यादा अच्छा कौन हो सकता है, भला?

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