'हिंदी' को 'जय श्री राम' क्यों बनाना चाहते हैं अमित शाह?

हम हिंदी भाषी लोगों को हिंदी से जितना प्यार है, क्या कन्नड़ और तमिल को अपनी भाषा से उससे कम प्यार होगा? आप उसे यह एहसास क्यों दिलाते हैं कि वह दोयम दर्जे का है? आपने उन भाषाओं को कोई तवज्जो नहीं दी है. अगर अचानक कहेंगे कि देश की भाषा हिंदी होगी तो बाकी सैकड़ों भाषाओं के लोगों को असुरक्षा क्यों नहीं होगी?

- कृष्ण कांत




बीजेपी हिंदी की भी नोटबंदी कर देगी. गृहमंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारत में हिंदी विरोध को फिर से हवा दे दी है. उन्होंने कहा, 'पूरे देश में एक भाषा का होना बेहद जरूरी है, जो दुनिया में उसकी पहचान बने. आज भारत को एकता की डोर में बांधने का काम कोई भाषा कर सकती है तो वह हिंदी है.'


इसके बाद बेंगलुरु में कई समूह प्रदर्शन कर रहे हैं. एमके स्टालिन, सिद्धारमैया, कुमारस्वामी, ओवैसी, नारायणसामी जैसे नेताओं ने इसका तीखा विरोध किया है.


डीएमके नेता स्‍टालिन ने कहा, 'हम हमेशा से अपने ऊपर हिंदी को थोपने का विरोध करते रहे हैं. अमित शाह के आज के बयान से हमें झटका लगा है. ये देश की एकता को प्रभावित कर सकता है. हमारी मांग है कि गृहमंत्री इस बयान को वापस लें.'


पुडुचेरी के सीएम नारायणसामी ने कहा, '​सिर्फ हिंदी को आगे बढ़ाने से देश एक नहीं रहने वाला. हमें हर धर्म, संस्कृति, भाषा का सम्मान करना चाहिए. यह भारत सरकार का मूल मंत्र रहा है. अमित शाह को अपने बयान का मूल्यांकन करना चाहिए.'


एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि 'पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है. पीएम मोदी कन्नड़ दिवस कब मनाएंगे जो कि संविधान में आधिकारिक भाषा है? याद रखिए कि कन्नड़ लोग भी इस देश का हिस्सा हैं.'


सिद्धारमैया का कहना है कि हम हिंदी के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे थोपने का विरोध करते हैं. हम इसे प्यार से अपना सकते हैं, लेकिन थोपने पर नहीं.'


ओवैसी का कहना है कि 'हिंदी हर भारतीय मातृभाषा नहीं है. संविधान हर आदमी को भाषा और संस्कृति की आजादी देता है. क्या आप इस विविधता का सम्मान कर सकते हैं? यह हिंदी, हिंदू और हिंदुत्व से बड़ी है.'


हम हिंदी भाषी लोगों को हिंदी से जितना प्यार है, क्या कन्नड़ और तमिल को अपनी भाषा से उससे कम प्यार होगा? आप उसे यह एहसास क्यों दिलाते हैं कि वह दोयम दर्जे का है? आपने उन भाषाओं को कोई तवज्जो नहीं दी है. अगर अचानक कहेंगे कि देश की भाषा हिंदी होगी तो बाकी सैकड़ों भाषाओं के लोगों को असुरक्षा क्यों नहीं होगी?


यह पार्टी हमेशा अतिउत्साह में रहती है, इसलिए यह हर अच्छे काम को ख़राब करती है. जैसे भ्रष्टाचार और कालाधन रोकने के लिए स्टंट किया तो 200 लोगों की जान ले ली और अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी. फायदा एक न हुआ.


भाजपा को यह समझना चाहिए आप एक किसी एक ही भाषा और संस्कृति को साझा करने वाले प्रांत के रजवाड़े नहीं हैं. आप एक ऐसे महादेश की सत्ता में हैं जहां पर जाने कितने देश एक छतरी के नीचे हैं. तमाम भाषाएं, तमाम संस्कृतियां, तमाम धर्म मिलकर 'हिंदुस्तान' का निर्माण करते हैं. आप सबके साथ रहना सीख लीजिए, वरना अंजाम ठीक तो नहीं ही होगा.

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