• Mohit Pathak

हॉंगककॉंग में प्रस्तावित प्रत्यर्पण विधेयक के विरोध में प्रदर्शन

ताजे विरोघ का कारण हॉंगकॉंग सरकार द्वारा लाया गया पत्यर्पण विधेयक है. जिसके तहत हॉंगकॉंग के किसी भी नागरिक को -जो कि अन्य देशों में अपराध करके हॉंगकॉंग भाग गया है- ताइवान, मुख्य चीन और मकाऊ के हवाले किया जा सकता है।

हॉंगकॉंग फिर उबाल में है. अबकी बार इस उबाल की वजह वह हॉंगकॉंग सरकार द्वारा लाया गया प्रत्यर्पण विधेयक बना है जिसके तहत हॉंगकॉंग के नागरिक किसी भी ऐसे अपराधी/आरोपी को ताइवान, चीन या मकाऊ के हवाले किया जा सकता है जो कि वहां से अपराध करके भागा हो.


हॉंगकॉंग में बार बार उभर रहे असंतोष का लंबा ​इतिहास है. सन् 1842 तक हॉंगकॉंग चीन की क्विंग वंश के आधीन था. हांगकांग पर अंग्रेज़ों और जापानियों का भी शासन रहा, जिस वजह से हांगकांग में चीनी और पाश्चात्य संस्कृति का मिश्रण पाया जाता है.


चीन और हांगकांग के बीच का विवाद 21 वीं शताब्दी के शुरुआत से और बढ़ गया, जिसका मुख्य कारण चीन की सरकार का हांगकांग के आतंरिक मामलों में हाताक्षेप माना जाता है.


गौरतलब है कि 2018 की शुरुआत में हॉंगकॉंग के एक शख्स चैंग टोंग-काई ने अपनी प्रेमिका पून ह्यु-विंग की हत्या कर दी थी. यह वाकिया तब हुआ जब वे ताइवान में छुट्टियां मना रहे थे. चैंग पर केवल चोरी और चोरी के सामान को संभालने का आरोप लगाया जा सका क्योंकि यह मामला ताइवान में हुआ था और हांगकांग और ताइवान के बीच कोई प्रत्यर्पण समझौता नहीं है. उस पर हत्या का आरोप नहीं लगाया जा सका, क्योंकि ताइवान के जांचकर्ताओं के पास उससे पूछताछ करने का कोई अनुमति नहीं मिली.


इस क़ानून के विरोध करने वालों का मानना है कि ये क़ानून चीनी सरकार को हॉंगकॉंग के नागरिको के ऊपर चीनी क़ानून के तहत क़ानूनी कार्यवाही करने कि इजाज़त दे देगा, जो कि हॉंगकॉंग के नागरिकों के साथ अन्याय होगा. उनकी मांग है कि इस क़ानून में प्रत्यपर्ण की संधि सिर्फ ताइवान की सरकार के साथ हो और जिसे छान टोंग -कई के पत्यर्पण के साथ ख़त्म कर दिया जाए.


हालांकि विधेयक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल उन अपराधों को इस विधेयक में शामिल किया गया है, जिनमें हॉंगकॉंग के क़ानून के तहत तीन साल से अधिक की सज़ा का प्रावधान है. फिर भी लोगों को भय है कि चीनी सरकार द्वारा इस क़ानून का दुरूपयोग किया जा सकता है.

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