तो क्या भारत में महंगा हो जाएगा मोबाइल डाटा?

वोडाफ़ोन आइडिया और एयरटेल भारत में टेलिकॉम के तक़रीबन आधे से ज्यादा बाज़ार पर नियंत्रण रखती हैं. इसका मतलब है कि अगर इनके टेरिफ़ में बदलाव होता है तो इसका सीधा असर पूरे भारत में दिखाई देगा.


दुनिया भर में सबसे स​स्ती मोबाइल डाटा इंटरनेट सेवाओं वाले देश ​भारत में अब यह प्रश्न गहराने लगा है कि ये स​स्ती सेवाएं कब तक बरक़रार रखी जा पाएंगी? देश की दो सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों —वोडाफ़ोन आइडिया और एयरटेल — ने घोषणा कर दी है कि वे अपने टेरिफ्स को बढ़ाने वाली हैं.


असल में यह आशंका पिछले दिनों भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री में हुए बड़े घटनाक्रमों का परिणाम है. हम सभी ने रिलाइंस ग्रुप की कंपनी जियो का उभार देखा है. असल में उसकी मार्केटिंग स्ट्रेटेज़ी ने ही यह बड़ा उलटफ़ेर किया है.


वोडाफ़ोन आइडिया और एयरटेल ने घोषणा की है कि उन्हें इस वित्तीय वर्ष की दूसरी चौथाई में 10 अरब डॉलर्स का नुकसान हुआ है. इसे आज के 1 डॉलर के मुक़ाबले रूपये की 71.75 की क़ीमत में आंकें तो यह नुक़सान तक़रीबन 717.5 अरब रूपयों का है.


यह दोनों कंपनियां भारत में टेलिकॉम के तक़रीबन आधे से ज्यादा बाज़ार पर नियंत्रण रखती हैं. इसका मतलब है कि अगर इनके टेरिफ़ में बदलाव होता है तो इसका सीधा असर पूरे भारत में दिखाई देगा.


तीन साल पहले रिलाइंस जियो के लांच के बाद, उसने फ़ोन कॉल्स और डेटा को फ्री में आॅफर कर अपना क्लाइंट बेस बेतहाशा बढ़ा लिया था. इसके ज़रिए वह भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण प्लेयर बन गया. उसके फ्री डेटा से टक्कर लेने के लिए मजबूरन अन्य कंपनियों को अपने दाम बेतहाशा गिराने पड़े.


फिर धीरे धीरे जियो ने डेटा और फ़ोन कॉल्स के तक़रीबन वही चार्जेज़ लेने शुरू किए जो अन्य बड़ी कंपनियां ले रही थी. इस पूरी प्रक्रिया ने आइडिया, वोडाफ़ोन और एयरटेल को घुटनों के बल ला खड़ा किया है. इस प्रतियोगिता में कंपीट करने के क्रम में आइडिया को तो वोडाफ़ोन में मर्ज तक होना पड़ा.

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