भयानक सदमे में ISIS के चंगुल से छूटे याज़िदी बच्चे

Amnesty International की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बच्चे 2014 से 2017 तक, जिस दौर में इस्लामिक स्टेट के क़ब्ज़े में रहे, उस दौरान उन्होंने कई स्तर पर टॉर्चर, बलात्कार और दूसरे कई क़िस्म के शोषण को झेला.

- Khidki Desk

एमेनेस्टी इंटरनेश्नल ने इस बारे में चेताया है कि ISIS यानी इस्लामिक स्टेट के हाथों बेहद अमानवीयता झेले तक़रीबन 2000 याज़िदी यानि कुर्द बच्चों को शारिरिक और मा​नसिक तौर पर पहुंचे आघातों से उबरने के लिए जैसी मदद की ज़रूरत है, उन तक ​नहीं पहुंच पा रही है.


बृहस्पतिवार को जारी की गई, 64 पन्नों में तैयार अपनी एक रिपोर्ट में एमेनेस्टी इंटरनेश्नल ने इसका विस्तृत ब्योरा पेश किया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट की ग़िरफ़्त से छूटे ये बच्चे अभी ईराक़ के कुर्द क्षेत्र में तक़रीबन लावारिस हालत में रह रहे हैं. ये बच्चे गंभीर बीमारियों और कमज़ोरी की चपेट में हैं और साथ ये कई किस्म की गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं से भी जूझ रहे हैं.


रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बच्चे 2014 से 2017 तक, जिस दौर में इस्लामिक स्टेट के क़ब्ज़े में रहे, उस दौरान उन्होंने कई स्तर पर टॉर्चर, बलात्कार और दूसरे कई क़िस्म के शोषण को झेला. इसके चलते ही इन तक़रीबन 1,992 बच्चों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस, एन्ज़ाइटी और ​डिप्रेशन के लक्षण आम हैं और उसके अलावा भी कई लक्षण और ऐसा व्यवहार उनमें देखा गया है जो कि चिंता जनक है. रिपोर्ट के ​मुताबिक़ ये बच्चे कई बार बेहद आक्रामक हो जाते हैं, अपने साथ बीती घटनाओं को याद करते हैं, डरावने सपने देखते हैं और इनमें मूड स्विंग के लक्षण भी देखे गए हैं.


इस रिपोर्ट में इन सवाइवर्स में मौजूद उन लड़कियों की स्थिति पर अधिक गहरी चिंता जाहिर की गई है जो कि यौनहिंसा की शिकार रहीं. उनमें कई तरह की स्वास्थ संबंधि दिक्कतें देखी गई हैं. रिपोर्ट में इन बच्चों का इलाज कर रहे एक डॉक्टर के हवाले से कहा गया है कि 9 साल से लेकर 17 साल की तक़रीबन हर लड़की को बलात्कार या दूसरे क़िस्म की यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है.

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